चांद के दीदार के साथ शुरू हुआ माहे रमज़ान

इस्लाम धर्म में रमजान महीने का बहुत महत्व है. पूरे एक माह तक मुस्लिम समाज के लोग रोजा रखते हैं. इस दौरान दिन के समय न कुछ खाया जाता है और न ही पिया जाता है. रमजान के महीने में रोजा रखने के पीछे तर्क दिया जाता है कि इस दौरान व्यक्ति अपनी बुरी आदतों से

इंडिया, कोर न्यूज़ टीम दिल्ली Last updated: 17 May 2018 | 11:48:00

चांद के दीदार के साथ शुरू हुआ माहे रमज़ान

रमजान का पाक महीना गुरुवार से शुरू हो रहा है. बुधवार को देश के तमाम हिस्सों में चांद देखा गया. तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में कई जगह चांद देखा गया है. रुयात-ए-हिलाल कमेटी और इमारत-ए-हिंद के बीच हुई बैठक ने इस बात की पुष्टि की. ऐसे में गुरुवार से रोज़े शुरू हो जाएंगे.

चंद्रमा या हिलाल के दिखने के आधार पर ये 16 मई की शाम से रोज़े शुरू हो जाएंगे. रमज़ान का महीना 17 जून या 18 जून को समाप्त होगा, क्योंकि चंद्र महीने में 29 या 30 दिन होते हैं.

इमारत-ए-शरीया हिंद के सचिव मुइजुद्दीन ने बयान जारी कर गुरुवार से रमज़ान शुरू होने की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि रूयत-ए-हिलाल कमेटी और इमारत-ए-शरीया हिंद ने घोषित किया है कि 17 मई को रमजान के महीने का पहला दिन है यानी कल पहला रोजा होगा.

वहीं, लखनऊ के इमाम ईदगाह मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली और मौलाना कल्बे जव्वाद ने भी गुरुवार को पहला रोजा होने का ऐलान किया. उलमाओं के साथ चांद देखने की बेकरारी बच्चों और बुजुर्गों में भी नजर आई. इसके बाद लोगों ने चांद नजर आने की खुशी में जमकर आतिशबाजी की.

इस्लाम धर्म में रमजान महीने का बहुत महत्व है. पूरे एक माह तक मुस्लिम समाज के लोग रोजा रखते हैं. इस दौरान दिन के समय न कुछ खाया जाता है और न ही पिया जाता है. रमजान के महीने में रोजा रखने के पीछे तर्क दिया जाता है कि इस दौरान व्यक्ति अपनी बुरी आदतों से दूर रहने के साथ ही खुद पर संयम रखता है.

कहा जाता है कि रोजा रखने वाले व्यक्ति को न केवल दिन के समय कुछ नहीं खाना चाहिए, बल्कि इसके बारे में सोचना तक नहीं चाहिये. रोजे के दौरान अगर कोई व्यक्ति झूठ बोलता है या पीठ पीछे किसी की बुराई करता है तो राजा टूटा हुआ माना जाता है. रोजा सिखाता है कि इस दौरान हम अपने जिस्म से कुछ भी गलत काम नहीं करे.

इस दौरान व्यक्ति को अपना मन शुद्ध रखना चाहिये। रोजे के दौरान मन में किसी प्रकार का गलत विचार नहीं रखना चाहिए. इस महीने के दौरान जितना संभव हो सके उतना गरीबों की मदद करनी चाहिए. इस महीने में ज्यादा से ज्यादा इबादत की जानी चाहिए.

 

 

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