पूजा में क्यों जरूरी है पान, जानिए कब से शुरू हुआ प्रयोग

यह भी एक कारण है कि क्यों हिन्दुओं द्वारा पूजा में पान के पत्ते का इस्तेमाल किया जाता है। केवल एक ही पत्ते में संसार के सम्पूर्ण देवी-देवताओं का वास होने के कारण इसे पूजा सामग्री में इस्तेमाल किया जाता है।

इंडिया, कोर न्यूज़ टीम दिल्ली Last updated: 13 July 2018 | 15:27:00

पूजा में क्यों जरूरी है पान, जानिए कब से शुरू हुआ प्रयोग

हिन्दू धर्म में पूजा की सारी विधि एवं सामग्री उपलब्ध होना भी एक महत्वपूर्ण है। इसमें एक खास वस्तु है पान। हिन्दू धर्म की मान्यता है कि पान के पत्तों में कई देवी-देवता वास करते है।

यह भी एक कारण है कि क्यों हिन्दुओं द्वारा पूजा में पान के पत्ते का इस्तेमाल किया जाता है। केवल एक ही पत्ते में संसार के सम्पूर्ण देवी-देवताओं का वास होने के कारण इसे पूजा सामग्री में इस्तेमाल किया जाता है।

पान के पत्ते के ठीक ऊपरी हिस्से पर इन्द्र एवं शुक्र देव विराजमान हैं। मध्य हिस्से में सरस्वती मां का वास है, तथा मां महालक्ष्मी जी इस पत्ते के बिलकुल नीचे वाले हिस्से पर बैठी हैं, जो अंत में तिकोना आकार लेता है।

इसके अलावा ज्येष्ठा लक्ष्मी पान के पत्ते के जुड़े हुए भाग पर बैठी हैं। यह वह भाग है जो पत्ते के दो हिस्सों को एक नली से जोड़ता है। विश्व के पालनहार भगवान शिव पान के पत्ते के भीतर वास करते हैं। भगवान शिव एवं कामदेव जी का स्थान इस पत्ते के बाहरी हिस्से पर है।

मां पार्वती एवं मंगल्या देवी पान के पत्ते के बाईं ओर रहती हैं तथा भूमि देवी पत्ते के दाहिनी ओर विराजमान हैं। अंत में भगवान सूर्य नारायण पान के पत्ते के सभी जगह पर उपस्थित होते हैं।

आइए जानते हैं पान के पत्तों का पूजा में ओर क्या महत्व हैं

पान हवन पूजा की एक अहम सामग्री है। हिन्दू धर्म में विशेष माने जाने वाले ‘स्कंद पुराण’ में भी पान का उल्लेख किया गया है। बताया गया है कि देवताओं द्वारा समुद्र मंथन के समय पान के पत्ते का प्रयोग किया गया था। तभी से पान का प्रयोग पूजा में किया जाने लगा।

पान का पत्ता नकारात्मक ऊर्जा को दूर करनेवाला और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने वाला भी माना जाता है। इसलिए भी इसे पूजा-पाठ में खास महत्व दिया गया है। अगर किसी को नजर लगी है, तो उस व्यक्ति को पान में गुलाब की सात पंखुड़ियां रखकर खिलाएं।

भगवान शिव को पान अर्पित करने से व्यक्ति का मनोकामना पूर्ण होती है। इस विशेष पान में केवल गुलकंद, खोपरे का बुरा, कत्था, सौंफ और सुमन कतरी डली हुई होती है। महादेव का पूजन कर नैवेद्य के पश्चात उनको यह पान अर्पण करें और घर में सुख-शांति पाएं।

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मंगलवार तथा शनिवार को हनुमान जी को एक डंठल वाला पान का पत्ता तथा लड्डू चढ़ाने से आपके लंबे समय से अटके कार्य पूरे होते हैं। इसके इलावा ऐसा आपको लगातार सात शनिवार तक करना चाहिए। इस उपाय से बड़ी से बड़ी समस्या भी हल हो जाती है।

ऐसी मान्यता है कि यदि आप किसी अच्छे काम के लिए रविवार को घर से निकल रहे हों तो, पान का पत्ता साथ रखकर घर से बाहर कदम रखना चाहिए। यह व्यक्ति के सभी रुके हुए कार्यों को सम्पन्न करने में उपयोगी साबित होता है।

इस तरह का पान चुनें

किंतु पूजा सामग्री के लिए पान के पत्ते का चयन करने के लिए व्यक्ति को बेहद सावधान रहना चाहिए। छिद्रों से भरपूर, सूखा हुआ एवं मध्य हिस्से से फटा हुआ पान का पत्ता सामग्री के लिए कभी भी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। पान का पत्ता हमेशा सही सलामत रूप में, चमकदार एवं कहीं से भी सूखा नहीं होना चाहिए। नहीं तो इससे व्यक्ति की पूजा पूर्ण नहीं होती।

 

 

 

 

credit by naidunia 

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