बिहारी के उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ को गूगल ने किया याद, गूगल ने बनाया खास डूडल

आम लोगों में शहनाई को लोकप्रिय बनाने में भी उन्होंने अहम भूमिका अदा की। गूगल डूडल में उस्ताद बिस्मिल्लाह खां को एक सफेद रंग की पोशाक में शहनाई बजाते हुए दिख रहे हैं।

इंडिया, कोर न्यूज़ टीम डेस्क Last updated: 21 March 2018 | 11:26:00

बिहारी के उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ  को गूगल ने किया याद, गूगल ने बनाया खास डूडल

बिहार के उस्ताद बिस्मिल्लाह खान को गूगल ने उनके 102 जन्मदिन पर याद कर उनकी शहनाई बजाते हुए तस्वीर को अपना डूडल बनाया |  उनका जन्म: 21 मार्च, 1961  को बिहार के डुमराव में पैदा   हुआ था  उन्हें भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

बिस्मिल्लाह खान ने आपने जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गुजारा था । बिस्मिल्लाह खां छोटी उम्र में ही अपने चाचा अली बख्स के साथ वाराणसी आ गए थे। वाराणसी की दालमंडी में उनका पैतृक घर है। अब भी बिस्मिल्लाह खां परिवार वाराणसी में ही रहता है। 

आम लोगों में शहनाई को लोकप्रिय बनाने में भी उन्होंने अहम भूमिका अदा की। गूगल डूडल में उस्ताद बिस्मिल्लाह खां को एक सफेद रंग की पोशाक में शहनाई बजाते हुए दिख रहे हैं। बिबिस्मिल्लाह खां आजादी के बाद ऐसे पहले भारतीय शहनाई वादक थे जिन्होंने महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू जैसी हस्तियों के सामने शहनाई बजाई। इसके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को उनका शहनाई वादन बेहद पसंद था। इंदिरा गांधी को जब वक्त मिलता वह बिस्मिल्लाह खां को आमंत्रण देकर शहनाई सुनतीं थीं।

पारिवारिक जीवन

उस्ताद का निकाह 16 साल की उम्र में मुग्गन ख़ानम के साथ हुआ जो उनके मामू सादिक अली की दूसरी बेटी थी। उनसे उन्हें 9 संताने हुई। वे हमेशा एक बेहतर पति साबित हुए। वे अपनी बेगम से बेहद प्यार करते थे। लेकिन शहनाई को भी अपनी दूसरी बेगम कहते थे। 66 लोगों का परिवार था जिसका वे भरण पोषण करते थे और अपने घर को कई बार बिस्मिल्लाह होटल भी कहते थे। लगातार 30-35 सालो तक साधना, छह घंटे का रोज रियाज उनकी दिनचर्या में शामिल था। अलीबख्श मामू के निधन के बाद खां साहब ने अकेले ही 60 साल तक इस साज को बुलंदियों तक पहुंचाया ।
 

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