शेल्टर होम रेप केस: ब्रजेश ठाकुर की कुर्क होगी 7.30 करोड़ की संपत्ति

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को कहा कि उसने बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर होम रेप मामले के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के 23 प्लॉट और तीन गाड़ियां समेत 7.30 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क की है.

इंडिया, कोर न्यूज़ टीम पटना Last updated: 14 March 2019 | 11:20:00

शेल्टर होम रेप केस: ब्रजेश ठाकुर की कुर्क होगी 7.30 करोड़ की संपत्ति

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को कहा कि उसने बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर होम रेप मामले के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के 23 प्लॉट और तीन गाड़ियां समेत 7.30 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क की है. मुजफ्फरपुर शेल्टर होम में लड़कियों से बलात्कार का आरोप है और उनका यौन उत्पीड़न किया गया था.

एजेंसी ने कहा कि उसने मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ बने कानून (पीएमएलए) के तहत ठाकुर की संपत्तियों को कुर्क करने के लिए अस्थायी आदेश जारी किया है. ठाकुर शेल्टर होम चलाने वाले एनजीओ सेवा संकल्प और विकास समिति का मालिक था. ईडी ने कहा, ‘26 प्लॉट, तीन गाड़ियां, 37 खातों में जमा पैसा, म्यूचुअल फंड और बीमा पॉलिसियों को मिलाकर कुल 7.30 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्तियां कुर्क की गई हैं. ये संपत्तियां आरोपी ब्रजेश ठाकुर और उसके परिवार की हैं.’ ईडी ने पिछले साल अक्टूबर में इस केस में पीएमएलए के तहत एक मामला दर्ज किया था.

ईडी ने कहा कि सरकार और अन्य की ओर से ठाकुर के एनजीओ को मिले पैसे को उसने और उसके परिवार के सदस्यों ने बेईमानी से निकाल लिया ताकि खुद के लिए अवैध संपत्ति बना सके. ईडी ने कहा कि जांच के दौरान मिले दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि दान और सरकारी सहायता से एनजीओ को 2011-12 से 2016-17 के दौरान सात करोड़ 57 लाख 48 हजार 820 रुपए मिले. एजेंसी ने कहा कि ठाकुर और उसके परिवार के सदस्यों ने अपने व्यक्तिगत लाभ और अपने नाम पर अचल और चल संपत्तियां खरीदने के लिए इस पैसे का घोटाला किया.

एजेंसी ने कहा कि एनजीओ के खाते से आरोपी के अखबार ‘प्रात: कमल’ के खाते में तकरीबन 1.53 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए. इस रकम का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर चल और अचल संपत्तियां खरीदने और ठाकुर के बेटे मेहुल आनंद की मेडिकल की फीस चुकाने के लिए किया गया. ईडी ने आरोप लगाया कि ठाकुर और उसके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में काफी नकदी पाई गई, जिसके बारे में वे नहीं बता सके. एजेंसी ने कहा, ‘एनजीओ अपने लक्ष्यों और मकसद से पूरी तरह भटक गया है.’

 

लड़कियों के बलात्कार का मामला टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) की रिपोर्ट में पहली बार सामने आया था. यह रिपोर्ट अप्रैल 2018 में राज्य के सामाजिक कल्याण विभाग को सौंपी गई थी. इस शेल्टर होम को चलाने वाले एनजीओ के मालिक ठाकुर समेत 11 लोगों के खिलाफ मई 2018 में एफआईआर दर्ज की गई थी. इस मामले की जांच बाद में सीबीआई को सौंप दी गई थी. मेडिकल टेस्ट में शेल्टर होम में रहने वाली 42 में से 34 लड़कियों के बलात्कार की पुष्टि हुई थी.

 

 

credit by: aaj tak 

Write Your Own Review

Customer Reviews

अन्य खबरे