भारत की आंतरिक्ष में एक और उड़ान , इसरो ने किया IRNSS-1 का सफल परीक्षण

IRNSS-1I वजनी 142 इस सैटेलाइट की लंबाई 1.58 मीटर, ऊंचाई 1.5 मीटर और चौड़ाई 1.5 मीटर है. सैटेलाइट से समुद्री नेविगेशन के साथ ही मैप और सैन्य क्षेत्र को मदद मिलेगी.

इंडिया, कोर न्यूज़ डेस्क Last updated: 12 April 2018 | 14:39:00

भारत की आंतरिक्ष में एक और उड़ान , इसरो ने किया IRNSS-1 का सफल परीक्षण

इसरो ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित प्रक्षेपण केंद्र से आज सुबह 4.04 बजे नेविगेशन सैटेलाइट (IRNSS-1I) को लॉन्च किया. IRNSS-1I स्वदेशी तकनीक से निर्मित नेविगेशन सैटेलाइट है. सातों उपग्रह नैवआईसी नौवहन उपग्रह पुंज का हिस्सा हैं। IRNSS-1I वजनी 142 इस सैटेलाइट की लंबाई 1.58 मीटर, ऊंचाई 1.5 मीटर और चौड़ाई 1.5 मीटर है. सैटेलाइट से समुद्री नेविगेशन के साथ ही मैप और सैन्य क्षेत्र को मदद मिलेगी. ये सैटेलाइट इसरो की नाविक प्रणाली का हिस्सा होगी.


यह प्रक्षेपण प्रतिस्थापन उपग्रह भेजने का इसरो का दूसरा प्रयास था। पिछले साल अगस्त में आईआरएनएसएस-1एच को ले जाने का पीएसएलवी का पूर्ववर्ती मिशन तब फेल हो गया था जब उपग्रह को वायुमंडल की गर्मी से बचाने के लिए इसे ढककर रखने वाला कवच (हीट शील्ड) अलग नहीं हो पाया था। इसरो ने कहा, ‘‘भारत का ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान अपनी 43वीं उड़ान में (पीएसएलवी-सी41) 41वें व्यवस्था क्रम में आईआरएनएसएस-1आई उपग्रह को श्ररीहिरकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के प्रथम प्रक्षेपण पैड से प्रक्षेपित करेगा।’’


270 करोड़ की लागत से तैयार हुए जीसैट 6-ए सैटेलाइट से ISRO का संपर्क टूटा

पिछले साल अगस्त में आईआरएनएसएस-1एच को ले जाने का पीएसएलवी का पूर्ववर्ती मिशन तब फेल हो गया था जब उपग्रह को वायुमंडल की गर्मी से बचाने के लिए इसे ढककर रखने वाला कवच (हीट शील्ड) अलग नहीं हो पाया था.

बता दें कि भारत का ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान अपनी 43वीं उड़ान में (पीएसएलवी-सी41) 41वें व्यवस्था क्रम में आईआरएनएसएस-1आई उपग्रह को श्ररीहिरकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के प्रथम प्रक्षेपण पैड से प्रक्षेपित किया गया.’

टिप्पणियांगुरुवार को भेजे गए कम्युनिकेशन उपग्रह जीसैट-6 ए में तकनीकी खराबी : सूत्र

आईआरएनएसएस-1आई मिशन प्रक्षेपण जीएसएलवी एमके-दो के जरिए जीसैट-6ए प्रक्षेपण के 14 दिन बाद हुआ. रॉकेट ने हालांकि जीसैट-6ए को कक्षा में प्रक्षेपित कर दिया था, लेकिन इसरो का उपग्रह से संपर्क टूट गया. 

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