पति नहीं कर सकता मजबूर पत्नी को साथ रहने के लिए , सुप्रीम कोर्ट

न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने अदालत कक्ष में मौजूद पति से कहा, ‘‘वह (पत्नी) कोई निजी संपत्ति नहीं है. आप उसे मजबूर नहीं कर सकते. वह आपके साथ नहीं रहना चाहती है

ICN टीम, नॉएडा
Last updated: 09 April 2018 | 11:44:00

पति नहीं कर सकता मजबूर पत्नी को साथ रहने के लिए , सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पत्नी कोई निजी संपति या वस्तु नहीं है और यदि पति अपनी पत्नी के साथ रहना भी चाहे तब भी पत्नी को इसके लिए मजबूर नहीं किया जा सकता. एक महिला की तरफ से पति पर क्रूरता का आरोप लगाते हुए दायर आपराधिक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की. महिला ने अपनी याचिका में कहा था कि वह अपने पति के साथ नहीं रहना चाहती, हालांकि उसका पति साथ रहना चाहता है.

एक महिला की तरफ से पति पर क्रूरता का आरोप लगाते हुए दायर आपराधिक मामले की सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी की. महिला ने अपनी याचिका में कहा था कि वह अपने पति के साथ नहीं रहना चाहती, हालांकि उसका पति साथ रहना चाहता है.


न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने अदालत कक्ष में मौजूद पति से कहा, ‘‘वह (पत्नी) कोई निजी संपत्ति नहीं है. आप उसे मजबूर नहीं कर सकते. वह आपके साथ नहीं रहना चाहती है. आप कैसे कह सकते हैं कि आप उसके साथ रहेंगे.’’

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अदालतें पत्नी को रखने के लिए पति को मजबूर नहीं कर सकती हैं. कोर्ट ने पेशे से पायलट एक व्यक्ति को अलग रह रही पत्नी और बेटे की परवरिश के लिए 10 लाख रुपये अंतरिम गुजारा भत्ता के तौर पर जमा कराने के लिए कहा था. वही महिला के साथ निजी संपत्ति की तरह व्यवहार कर रहे हैं. वह कोई वस्तु नहीं है.’’ इस मामले में अगली सुनवाई आठ अगस्त को होगी.

Write Your Own Review

Customer Reviews

सबसे तेज़

अन्य खबरे