देश के कई राज्यो में क्यो हो रही है कैश की किल्लत , जाने बड़ी वजह

कैश की किल्लत: देवास बैंक नोट प्रेस में 3 शिफ्ट में काम कर रहे हैं कर्मचारी

इंडिया, कोर न्यूज़ टीम डेस्क Last updated: 18 April 2018 | 11:31:00

देश के कई राज्यो में क्यो हो रही है कैश की किल्लत , जाने बड़ी वजह

मंगलवार को देश के कई छोटे-बड़े शहरों में एटीएम से कैश गायब होने की खबर से हड़कंप मच गया है. बड़ी संख्या में लोग एटीएम में पहुंचने लगे, हालांकि वित्त मंत्री ने साफ़ किया कि कैश की कोई कमी नहीं है. अब वित्त मंत्रालय ने एक हफ्ते में कैश की किल्लत दूर करने का दावा किया है. बनारस, भोपाल, पटना, हैदराबाद- हर जगह एटीएम ख़ाली दिखे और लोगों की भीड़ दिखी. खबर चल पड़ी थी कि एटीएम में पैसा नहीं है.

कैश की किल्लत: देवास बैंक नोट प्रेस में 3 शिफ्ट में काम कर रहे हैं कर्मचारी

वहीं वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि देश में कैश के हालात का जायज़ा लिया. कुल मिलाकर पर्याप्त से ज़्यादा कैश बाज़ार में है और बैंकों के पास भी है. कुछ इलाक़ों में अचानक और बढ़ी हुई मांग से पैदा हुई क़िल्लत से जल्द ही निबटा जा रहा है. बैंकिग सचिव राजीव कुमार ने एनडीटीवी से कहा कि 85 फ़ीसदी एटीएम मशीनों में कैश है. 10 से 12 फीसदी मशीनें हमेशा रखरखाव में रहती हैं. लेकिन फिर संकट क्यों है? राजीव कुमार की सफ़ाई है कि मार्च अप्रैल में कैश की मांग ज़्यादा होती है.

क्यों हो रही कैश की क़िल्लत?
1- फाइनेंशियल रिजॉल्यूशन ऐंड डिपॉजिट इंश्योरेंस बिल का डर. इस बिल के मुताबिक, अगर कोई बैंक डूब रहा हो, दिवालिया हो रहा हो तो आपके जो पैसे वहां जमा हैं उनकी क्या गारंटी है, बैंक कितने पैसे लौटाने के लिए बाध्य हैं?
2- इस बिल के मुताबिक, खाताधारकों के जमा पैसे का इस्तेमाल बैंक को उबारने में किया जा सकता है. डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन भी खत्म किया जाना है. इसके तहत खाताधारकों को एक लाख रुपये तक लौटाने की गारंटी मिली है.
3- ग्राहकों के पैसों से बैंकों की सेहत सुधारने का प्रावधान, बिल के चैप्टर 4 सेक्शन 2 को लेकर भी है. इसके मुताबिक रेज़ोल्यूशन कॉरपोरेशन रेग्यूलेटर से सलाह-मश्विरे के बाद यह तय करेगा कि दिवालिया बैंक के जमाकर्ता को उसके जमा पैसे के बदले कितनी रकम दी जाए. वह तय करेगा कि जमाकर्ता को कोई खास रकम मिले या फिर खाते में जमा पूरा पैसा.
4- लगातार बढ़ रहे NPA की वजह से ग्राहकों में घबराहट है. सार्वजनिक क्षेत्र के यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 1,250 करोड़ रुपये का भारी भरकम नुकसान हुआ है
5- डर की वजह से बैंकों, ATM से ज़्यादा पैसे निकालने की होड़
6- एक साल से 2000 को नोटों का छपना क़रीब-क़रीब बंद, वहीं एसबीआई के डिप्‍युटी एमडी नीरज व्यास का कहना है कि 2000 रुपये के नोट सर्कुलेशन में नहीं आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि एटीएम में हम 2000 रुपये के जितने भी नोट डालते हैं, वे निकल जाते हैं, लेकिन फिर काउंटर पर नहीं लौटते.
7- 200 के नोटों के लिए 70 फ़ीसदी एटीएम तैयार नहीं यानि इन एटीएम मशीन को अपटेड किया जाना है.
8- कृषि क्षेत्र में खरीद-फरोख्त में बढ़ोतरी हुई है जिसकी वजह से भी बाजार से ज्‍यादा निकाला जा रहा है.
9- यह शादियों का सीजन है और ऐसे में लोग पैसे निकालकर अपने पास रख रहे हैं ताकि बाद में दिक्‍कत कम हो.  
10- कंपनियों द्वारा वित्तीय साल का क्लोज़र 




 news courtesy - khabar.ndtv

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