अन्ना हजारे ने केंद्र सरकार के मौजूदा ड्राफ्ट को किया नामंजूर जारी रहेगी अनशन

अन्ना ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि जब तक प्राण है ये अनशन खत्म नहीं होगा। साथ ही कहा कि भगवान की कृपा है कि अब तक ठीक हूं। इतना ही नहीं, अन्ना हजारे ने यह भी कहा कि मुझे विश्वास है कि जब तक मांग पूरी नहीं होगी भगवान मुझे संभालेगा।

इंडिया, कोर न्यूज़ टीम डेस्क Last updated: 28 March 2018 | 13:27:00

अन्ना हजारे ने केंद्र सरकार के  मौजूदा ड्राफ्ट को किया नामंजूर जारी रहेगी अनशन

किसानों  और लोकपाल के मुद्दे को लेकर समाजसेवी अन्ना हजारे ६ दिनों से लगतार अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे है उनकी सेहत लगातार खराब हो रही है. वहीं सरकार की तरफ से उन्हें मनाने की कोशिशें भी तेज़ हो गई हैं. इस बीच सरकार की ओर से कई प्रतिनिधी अण्णा हजारे को मनाने की जुगत में जुट चुके हैं उम्मीद जताई जा रही है बुधवार को अन्ना और सरकार के बीच कोई सहमति बन सकती है.

 अन्ना ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि जब तक प्राण है ये अनशन खत्म नहीं होगा। साथ ही कहा कि भगवान की कृपा है कि अब तक ठीक हूं। इतना ही नहीं, अन्ना हजारे ने यह भी कहा कि मुझे विश्वास है कि जब तक मांग पूरी नहीं होगी भगवान मुझे संभालेगा। 

अन्ना किसानों की कर्ज माफी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश लागू करवाने की मांग कर रहे हैं. स्वामीनाथन कमिटी ने किसानों को लागत पर 50% मुनाफे का प्रावधान करने की सिफारिश की थी. इसके अलावा अन्ना की मजबूत लोकपाल और चुनाव सुधार से जुड़ी मांगें भी हैं. सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर महाराष्ट्र सरकार में मंत्री गिरीश महाजन के मुताबिक लोकपाल को छोड़ कर अन्य प्रमुख मांगों पर सहमति बन गई है और लोकपाल पर भी जल्द बात बन जाएगी.  


लोकपाल और चुनाव सुधार तो पुराने मुद्दे हैं लेकिन इस बार अन्ना किसानों पर फोकस कर रहे हैं. भले ही महाराष्ट्र सरकार उनसे बातचीत कर रही हो लेकिन अन्ना के सीधे निशाने पर केंद्र सरकार ही हैं. वो पूछ रहे हैं कि चार सालों में मोदी सरकार ने कितने वादे निभाए? अन्ना किसानों की कर्ज माफी और फसल पर 50% मुनाफे के साथ-साथ किसानों के लिए पेंशन और फसलों के मूल्य निर्धारण आयोग को स्वायतता देने की मांग कर रहे हैं.

इस आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए लोग देश के अलग अलग हिस्सो से आए हैं. पंजाब से लेकर महाराष्ट्र, यूपी, एमपी, राजस्थान जैसे तमाम राज्यों के लोग इसमें शामिल हैं. इनमें से ज्यादातर किसान हैं जो अपनी फसलों के सही दाम चाहते हैं. 

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