POK के मुजफ्फराबाद में लगे पाक विरोधी नारे , कहा अपनी आजादी छीन छीन के रहेंगे

लोगों ने आरोप लगाया कि, पाकिस्तान की सेना लोगों को हटाकर पीओके में भारत से लगती सीमा पर आतंकियों के कैंप बसा रही है. जहां उन्हें ट्रेनिंग दी जाती है. आर्मी ने पीओके के बुनियादी ढांचे पर भी जबरन कब्जा कर लिया है |

ICN टीम, नॉएडा
Last updated: 19 March 2018 | 11:25:00

The anti-Pakistan slogans residents in pok

 पाक अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद में लोग एक बार फिर पाकिस्तान के खिलाफ सड़कों पर उतर आए. लोगों ने पाकिस्तान विरोधी नारे लगाए. इस दौरान वे पीओके की आजादी को लेकर भी नारे लगाते दिखे. इस दौरान लोगों ने नारों के जरिए आजादी छीनने की बात कही. बताया जा रहा है कि स्थानीय लोगों में पाकिस्तानी सेना द्वारा लगातार किए जा रहे सीजफायर उल्लंघन और पीओके के लोगों के प्रति सरकार के सौतेले व्यवहार को लेकर काफी नाराजगी है. 

सीजफायर उल्लंघन का लोगो ने किया खुलकर विरोध...... 

जानकारी के मुताबिक, सीमा पर पाकिस्तानी सेना की ओर से हो रहे सीजफायर उल्लंघन को लेकर आम लोग मुजफ्फराबाद में सड़कों पर उतर आए. वे सीजफायर में मरने वाले लोगों और सरकार के उनके प्रति सौतेले व्यवहार को लेकर नाराज थे.

लोगों ने आरोप लगाया कि जब से कश्मीर के इस हिस्से पर पाकिस्तान ने कब्जा किया है, तब से ही लगातार उनसे सौतेला व्यवहार किया जा रहा है. लोगों ने आरोप लगाया कि इस इलाके में पाकिस्तान द्वारा लगातार उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यहां लोगों के अचानक गायब होने व क्रूरता से हत्या किए जाने की घटनाएं आम हो गई हैं.

लोगों ने आरोप लगाया कि, पाकिस्तान की सेना लोगों को हटाकर पीओके में भारत से लगती सीमा पर आतंकियों के कैंप बसा रही है. जहां उन्हें ट्रेनिंग दी जाती है. आर्मी ने पीओके के बुनियादी ढांचे पर भी जबरन कब्जा कर लिया है. यदि विरोध किया जाए तो सेना उन पर बंदूक तान देती है |

यूनाइडिट कश्मीर पीपुल्स नेश्नल पार्टी के प्रमुख, शौकत अली कश्मीरी ने सरकार पे लगाए गंभीर आरोप ......

यूनाइडिट कश्मीर पीपुल्स नेश्नल पार्टी के प्रमुख, शौकत अली कश्मीरी ने बताया कि, सरकार उनके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार करती है. उन्होंने कहा कि जब कोई पाकिस्तानी सीजफायर में मरता है तो सरकार उसे 10 लाख का मुआवजा देती है, जबकि पीओके में ऐसा होने पर पीड़ित के परिवार को तीन लाख रुपये दिए जाते हैं. यहां तक कि सरकार की ओर से सीजफायर के कारण विस्थापित लोगों को दोबारा बसाने की कोशिश भी नहीं की जाती है. |

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