अन्ना की हालत आडवाणी जैसी हो गई , शिवसेना

सामना में लिखा गया है कि ये तो अच्छी बात है कि अन्ना सही सलामत अपने गांव वापस लौट आए, लेकिन इस अनशन से क्या हासिल हुआ, अन्ना का वजन 6-7 किलो घट गया ??

इंडिया, कोर न्यूज़ टीम मुंबई Last updated: 31 March 2018 | 12:00:00

अन्ना की हालत आडवाणी जैसी हो गई , शिवसेना

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के माध्यम से अन्ना हजारे पर निशाना साधा है. सामना ने आपने संपादकीय में सवाल पूछा है कि लोकपाल तथा किसानों की कर्ज माफी जैसे सवालों पर दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन करने से अन्ना हजारे को क्या हासिल हुआ.

इसके अलावा सामना के संपादकीय में यह भी कहा गया है अन्ना की अवस्था लालकृष्ण आडवाणी जैसी हो गई है. अंतर सिर्फ इतना है कि आडवाणी मौन हो गए और अन्ना बोल रहे हैं. बोलने से कुछ हासिल नहीं होगा ऐसा आडवाणी को लगता है और बोलते रहने से भूखे रहने से सरकार सुनेगी इस भ्रम में अन्ना हैं.

सामना में लिखा गया है कि ये तो अच्छी बात है कि अन्ना सही सलामत अपने गांव वापस लौट आए, लेकिन इस अनशन से क्या हासिल हुआ, इस पर लोग सवाल पूछ रहे हैं. अन्ना का वजन 6-7 किलो घट गया, लेकिन इस आंदोलन से हाथ कुछ नहीं आया.

सामना के संपादकीय लेख में कटाक्ष करते हुए कहा गया है कि फडणवीस की मध्यस्तता से ही अनशन टूटना था. अन्ना को उन्हीं पर विश्वास करना था, तो रामलीला मैदान की जगह अन्ना अपने गांव रालेगणसिद्धि में ही आंदोलन करते. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या गृह मंत्री राजनाथ सिंह रामलीला मैदान जाएंगे, ऐसा तो होने वाला नहीं था. लेकिन केंद्र का कोई तो कैबिनेट मंत्री जाएगा ऐसा लग रहा था. सामना ने अंत में लिखा है कि अन्ना ने अगली तारीख देकर अनशन तोड़ दिया. भ्रष्टाचारी वैसे ही हैं, किसानों की मौत बढ़ रही है.

संपादकीय में आगे लिखा है, "6 महीने में मांगें मंजूर नहीं हुई तो दोबारा अनशन पर बैठूंगा ऐसा अन्ना हजारे ने कहा है अन्ना पर हमला बोलते हुए सामना के संपादकीय में आगे लिखा है, "महाराष्ट्र के लोकायुक्त मिस्टर इंडिया की तरह है तथा सेवानिवृत्त प्रशासकीय अधिकारियों के लिए गाड़ी घोड़े का इंतजाम करने तक ही इस पद का महत्व बने रहने से भ्रष्टाचार के चूहे मंत्रालय कुतर रहे हैं. अन्ना ने सात दिनों तक अनशन किया. लेकिन लोगों का समर्थन नहीं मिला. भीड़ छंट गयी है. मीडिया ऐसी टिप्पणी कर रहा था.

पिछली बार भीड़ थी और मीडिया ने माहौल गर्म कर रखा था. इस बार मीडिया ने अन्ना से जी चुरा लिया है. अन्ना का आंदोलन सफल नहीं होने देने का यह सभी का एजेंडा था. इसलिए दिल्ली में भी बड़े मंत्री तथा राजनीतिज्ञ अन्ना से मिलने नहीं गए. सातवें-आठवें दिन अन्न का गला जब सूखने लगा तब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को बुलाया गया. मुख्यमंत्री फडणवीस की मध्यस्थता से अनशन टूटना था. उन्हीं के तत्वतः आश्वासनों पर विश्वास करना था तो फिर रामलीला मैदान के बजाय रालेगण सिद्धि में आंदोलन करने पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए थी."

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