राजस्थान: कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासत तेज, रामेश्वर डूडी भी दौड़ में शामिल

सुशांत पारीक/जयपुर: राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद की दावेदारी को लेकर चल रही अंतरकलह खुल कर सामने आ गई है.

इंडिया, कोर न्यूज़ टीम जयपुर Last updated: 03 November 2018 | 11:55:00

राजस्थान: कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासत तेज, रामेश्वर डूडी भी दौड़ में शामिल

सुशांत पारीक/जयपुर: राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद की दावेदारी को लेकर चल रही अंतरकलह खुल कर सामने आ गई है. खासतौर पर अभी तक अशोक गहलोत और सचिन पायलट कैम्प के बीच चलने वाली इस जंग में रामेश्वर डूडी ने भी अपनी ताल ठोक दी है. इतना ही नहीं मुख्यमंत्री पद की दावेदारी में अब जातिगत समीकरणों का भी सहारा लिया जाने लगा है. कांग्रेस के दो बड़े नेताओं के दो ऐसे बयान सामने आए हैं जिसने ना केवल कांग्रेस की सियासत में फिर से भूचाल ला दिया है बल्कि भाजपा को भी हमला करने का एक और मौका दे दिया.

इसमें कहीं कोई दो राय नहीं है कि राजस्थान कांग्रेस में पिछले 1 साल से अशोक गहलोत और सचिन पायलट कैंप के बीच तकरार और बयानबाजी का दौर चलता रहा है. कई अवसरों पर अशोक गहलोत सचिन पायलट मीडिया के सामने एक दूसरे को लेकर बयान बाजी कर चुके हैं. लेकिन दोनों नेताओं की तरफ से कभी भी जातिगत समीकरणों को आधार बनाकर बयान बाजी नहीं की गई है. लेकिन अब इस बयान बाजी के खेल में कई और किरदार भी जुड़ने लगा हैं और यह किरदार कोई और नहीं कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी हैं.

खासतौर पर राजस्थान में जाट मुख्यमंत्री बनने की पैरवी करने वालों के बीच कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी भी मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल हो चले हैं. रामेश्वर डूडी ने इससे पहले खुद को सीएम की दौड़ में शामिल नहीं बताया हो लेकिन उनकी विधानसभा क्षेत्र के लोग जानते हैं कि सीएम पद को लेकर उनकी हसरते समय-समय पर सामने आती रही हैं. लेकिन इस बार उन्होंने खुलकर नोखा की जनता से ही कह दिया है कि आप मुझे विधायक बनाइए नंबर वन बनने का रास्ता मुझे खुद पता है. वहीं मुख्यमंत्री की कुर्सी को पाने के लिए राजनीति में सुचिता के नियमों को कैसे ताक पर रखा जाता है. इसकी एक बानगी भी कांग्रेस के नेता के बयान के जरिए सामने आई है. खेडडी से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जितेंद्र सिंह गुर्जर अपने समर्थकों को गुर्जर नेता के तौर पर संबोधित कर रहे हैं. जहां जितेंद्र सिंह यह कहा कि `राजस्थान में सचिन पायलट के तौर पर पहली बार एक गुर्जर मुख्यमंत्री बन सकता है. लिहाजा कार्यकर्ताओं को उसी दिशा में काम करना है.`

यह वही जितेंद्र सिंह है जो पिछली गहलोत सरकार में ऊर्जा मंत्री रहे हैं. अशोक गहलोत के बेहद खास माने जाते रहे हैं और गुर्जर आंदोलन से निपटने में मुख्य रणनीतिकार भी रहे हैं. लेकिन यही जितेंद्र सिंह अब पूरी तरह से पाला बदल चुके हैं और कैसे जातिगत आधार पर राजस्थान के मुख्यमंत्री का चुनाव करने की बात कही जा रही है.

इसमें कहीं कोई दो राय नहीं है कि राजस्थान की सियासत में कांग्रेस के भीतर लंबे समय से अंतरकलह चल रही है. खबरों के मुताबिक अभी तक केवल दो ही पक्ष इस दौड़ में शामिल थे लेकिन नेताओं के बयानों से अब लगता है कि मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है. वहीं त्रिकोणीय होने के साथ साथ इसमें जाति का तड़का भी लग चुका है.

 

 

 

credit by: zee news

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