इस हनुमान जयंती पूरी होगी हर मनोकामना , इस विधि से करे पूजा

भगवान शिव के 11वें अवतार माने जाते हैं बजरंग बली। कहा जाता है कि इनके मात्र नाम लेने से कई प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं। हर साल चैत्र शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को हनुमान जयंती मनाई जाती है। इस साल यह 31 मार्च को पड़ रही है ।

इण्डिया, कोर न्यूज़ टीम नोएडा Last updated: 29 March 2018 | 03:37:00

इस हनुमान जयंती पूरी होगी हर मनोकामना , इस विधि से करे पूजा

जानकारों की माने तो 31 मार्च 2018 को पड़ने वाली हनुमान जयंती काफी लाभकारी सिद्ध होने वाली है बस सच्चे मन और पूरी लगन से भगवन हनुमान की पूजा करने ही जरुरत है , कभी कभी ऐसा होता है की इंसान पूरी लगन से भगवान् की पूजा करता है लेकिन उसे मन मुताबिक फल नहीं मिलता और इसकी सबसे बड़ी वजह है पूजा के सही विधि की जानकारी न होना |

 

भगवान शिव के 11वें अवतार माने जाते हैं बजरंग बली। कहा जाता है कि इनके मात्र नाम लेने से कई प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं। हर साल चैत्र शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को हनुमान जयंती मनाई जाती है। इस साल यह 31 मार्च को पड़ रही है । ज्योतिषियों की मानें तो हनुमान जयंती 30 मार्च को शाम  07:35 से 31 मार्च को शाम 6 बजे तक है।

हनुमान जयंती पर इस विधि विधान से पूजा करने पर पूरी होगी हर मनोकामना .......

 हनुमान जयंती के द‍िन अगर व्रत रखते हैं तो इस दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। जो भी वस्‍तु दान दें विशेष रूप से मिठाई तो उस दिन स्‍वयं मीठे का सेवन ना करें। 
राम भक्‍त हनुमान सीता जी में माता का दर्शन करते थे और बाल ब्रह्मचारी के रूप में स्‍त्रियों के स्‍पर्श से दूर रहते हैं।

 इसलिए माता स्‍वरूप स्‍त्री से पूजन करवाना और उनका स्‍पर्श करना वे पसंद नहीं करते। फिर भी यदि महिलाएं चाहे तो हनुमान जी के चरणों में दीप प्रज्‍जवलित कर सकती हैं।  लेकिन उन्‍हें ना तो छुएं और ना ही उन्‍हें तिलक करें। महिलाओं का हनुमान जी को वस्‍त्र अर्पित करना भी वर्जित है। 

काले या सफ़ेद वस्त्र धारण करके हनुमान जी की पूजा न करें। ऐसा करने पर पूजा का नकरात्मक प्रभाव पड़ता है। हनुमान जी की पूजा लाल और यदि लाल ना हो तो पीले वस्‍त्र में ही करें।  
हनुमान जी की पूजा में शुद्धता का बड़ा महत्‍व है। इसलिए हनुमान जयंती पर उनकी पूजा करते समय अपना तन मन पूरी तरह स्‍वच्‍छ कर लें। इसका मतलब है कि मांस या मदिरा इत्यादि का सेवन करके भूल से भी ना तो हनुमान जी के मंदिर ना जाये और ना घर पर उनकी पूजा न करें।

 पूजन के दौरान गलत विचारों की ओर भी मन को भटकने न दें। यदि आप का मन अशांत है और आप क्रोध में है तब भी हनुमान जी की पूजा न करें। शांतिप्रिय हनुमान को ऐसी पूजा से प्रसन्‍नता नहीं होती और उसका फल नहीं मिलता। हनुमान जी की पूजा में चरणामृत का प्रयोग नहीं होता है। साथ खंडित अथवा टूटी मूर्ति की पूजा करना भी वर्जित है। 


ध्यान रखने वाली बाते ....... 


-पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके लाल आसन पर बैठें।

-लाल धोती और ऊपर वस्त्र चादर, दुपट्टा आदि डाल लें।

-सामने छोटी चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर तांबे की प्लेट पर लाल पुष्पों का आसन देकर हनुमान जी की मूर्ति स्थापित करें।

-मूर्ति पर सिंदूर से टीका कर लाल पुष्प अर्पित करें।

-मूर्ति पर सिंदूर लगाने के बाद धूप-दीप, अक्षत, पुष्प एवं नैवेद्य आदि से पूजन करें।

-सरसों या तिल के तेल का दीप एवं धूप जलाएं।

-द्वादश नामों का स्मरण 151 बार करें।


 

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