2 अप्रेल को धोनी के एक छक्के ने भारत को दिलाया था वर्ड कप

इस तरह भारत ने श्रीलंका को 6 विकेटों से मात दे दी. 28 साल के लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर भारत ने वर्ल्ड कप अपने नाम किया. इसके साथ ही न केवल देश में बल्कि दुनिया में जहां-जहां भी हिन्दुस्तानी बसे हैं वहां जश्न का दौर शुरू हो गया.

इण्डिया, कोर न्यूज़ टीम दिल्ली Last updated: 02 April 2018 | 11:10:00

2 अप्रेल को धोनी के एक छक्के ने भारत को दिलाया था वर्ड कप

भारत ने आज के ही दिन (2 अप्रैल) 2011 में दूसरी बार वर्ल्ड कप पर कब्जा किया था. 1983 में भारत ने पहली बार चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया था. यानी 28 साल बाद टीम इंडिया ने एक बार फिर इतिहास रच डाला. इसके साथ ही भारतीय टीम वेस्टइंडीज और ऑस्ट्रेलिया के बाद तीसरी ऐसी टीम बनी, जो दो या इससे अधिक बार खिताब पर कब्जा करने में सफल रही.

दरअसल, धोनी के इस छक्के के साथ क्रिकेट जगत में भारत का नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया था. धोनी के इस छक्के की बदौलत भारतीय क्रिकेट टीम दूसरी बार क्रिकेट विश्व कप विजेता बनी थी. 2011 क्रिकेट वर्ल्ड कप का फाइनल दोनों मेजबानों श्रीलंका और भारत के बीच वानखेड़े स्टेडियम, मुंबई में 2 अप्रैल 2011 को खेला गया. ये क्रिकेट के इतिहास में पहली बार हो रहा था कि उप-महाद्वीप की दो टीमें फाइनल में थीं. भारत और श्रीलंका न सिर्फ कागज पर बल्कि मैदान पर भी श्रेष्ठ टीमें थी.

2011 विश्वकप के फाइनल मुकाबले में भारत को इतिहास रचने के लिए 11 गेंदों पर 4 रन की जरूरत थी. क्रीज पर कप्तान महेंद्र सिंह धोनी मौजूद थे. उस वक्त शायद उनके दिमाग में चल रहा होगा कि वे दमदार शॉट के साथ टीम को जीत दिलाएं. यही वजह रही कि उन्होंने इतने महत्वपूर्ण मैच में भी नुवान कुलसेकरा की गेंद को लांग ऑन के ऊपर से एक शानदार छक्के जड़ने का जोखिम लिया और उसमें सफल भी हो गए.

इस तरह भारत ने श्रीलंका को 6 विकेटों से मात दे दी. 28 साल के लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर भारत ने वर्ल्ड कप अपने नाम किया. इसके साथ ही न केवल देश में बल्कि दुनिया में जहां-जहां भी हिन्दुस्तानी बसे हैं वहां जश्न का दौर शुरू हो गया.

एक समय टीम इंडिया 114 रनों पर 3 विकेट खो चुकी थी. ओपनर गौतम गंभीर क्रीज पर थे और उनका साथ देने के लिए युवराज को आना था, लेकिन सबको हैरत में डालते हुए कप्तान धोनी युवराज से पहले क्रीज पर आ गए. उन्होंने धमाकेदार पारी खेल कर भारत को जीत दिलाई, वे मैन ऑफ द मैच रहे.

 

`मैन ऑफ द मैच` महेंद्र सिंह धोनी नाबाद 91 रन बनाए. युवराज सिंह को प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का खिताब दिया गया. युवराज ने क्रिकेट विश्व कप 2011 के नौ मैचों में 362 रन बनाए जिसमें एक शतक और चार अर्धशतक भी शामिल है. इन्होंने 15 विकेट भी लिए. विश्व क्रिकेट के इतिहास में भारत और श्रीलंका दोनों के लिए यह तीसरा फ़ाइनल मैच था. इसके पहले भारत वर्ष 1983 में और वर्ष 2003 में फाइनल में पहुंचा था.

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