गोरखपुर के इस मदरसे में पढाई जाती है संस्कृत

क्योंकि अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले बच्चों के लिए यह मदरसा आधुनिक शिक्षा का केंद्र बना दिया गया है. यहां विज्ञान, गणित, अंग्रेज़ी, अरबी के साथ-साथ हिन्दी और यहां तक कि संस्कृत भाषा भी पढ़ाई जा रही है.

इंडया, कोर न्यूज़ टीम लखनऊ Last updated: 11 April 2018 | 14:19:00

गोरखपुर के इस मदरसे में पढाई जाती है संस्कृत

अभी आप ने सोचा था की मदरसों में भी संस्कृत पढाई जाएगी ,तो अधिकांश लोगो की जुबान से यही निकलता है नहीं लेकिन वक्त के साथ-साथ अब देश के मदरसों में भी बदलाव देखा जा रहा है. गोरखपुर में दारुल उलूम हुसैनिया मदरसे की चर्चा इस समय दूर-दूर तक हो रही है, क्योंकि अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले बच्चों के लिए यह मदरसा आधुनिक शिक्षा का केंद्र बना दिया गया है. यहां विज्ञान, गणित, अंग्रेज़ी, अरबी के साथ-साथ हिन्दी और यहां तक कि संस्कृत भाषा भी पढ़ाई जा रही है.

इससे पहले शायद यह बात पहले कभी नहीं सुनी गई कि किसी मदरसे में संस्कृत भी पढ़ाई जा रही हो. गोरखपुर का यह मदरसा उत्तर प्रदेश शिक्षा बोर्ड के अंतर्गत चलाया जाता है, और सबसे खास बात यह है कि संस्कृत भाषा पढ़ाने के लिए भी यहां मुस्लिम शिक्षक ही नियुक्त किया गया है. गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस समय मदरसों को आधुनिक बनाने के लिए कई तरह के कदम उठा रहे हैं.

वेब पोर्टल पर पंजीयन अनिवार्य किए जाने के बाद 2,000 से ज़्यादा मदरसे फर्ज़ी पाए गए थे. इन पर सालाना 100 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए जाते थे. राज्य सरकार इन फर्ज़ी मदरसों के मामले में जांच कर रही है. सभी मदरसों के प्रबंधन से उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड के वेब पोर्टल पर अपने बारे में पूरी जानकारी अपलोड करने को कहा गया था. मगर ऐसा करने के लिए अंतिम तारीख कई बार बढ़ाए जाने के बावजूद मदरसों द्वारा संचालित 140 मिनी आईटीआई में से 20 ने अपनी जानकारी नहीं दी. इसके अलावा करीब 2,300 मदरसों ने भी पोर्टल पर अपना पंजीयन नहीं कराया.

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