Chardham Yatra: बर्फ से ढकी केदारपुरी कर रही है देश-विदेश के यात्रियों को सम्मोहित

रुद्रप्रयाग समुद्रतल से 3553 मीटर (11654 फीट) की ऊंचाई पर बर्फ से ढकी केदारपुरी देश-विदेश के यात्रियों को सम्मोहित कर रही है। ऐसे में यात्री बाबा के दर्शनों के साथ इस बर्फीले सौंदर्य का भी भरपूर आनंद ले रहे हैं।

इंडिया, कोर न्यूज़ टीम देहरादून Last updated: 13 May 2019 | 12:12:00

Chardham Yatra: बर्फ से ढकी केदारपुरी कर रही है देश-विदेश के यात्रियों को सम्मोहित

रुद्रप्रयाग समुद्रतल से 3553 मीटर (11654 फीट) की ऊंचाई पर बर्फ से ढकी केदारपुरी देश-विदेश के यात्रियों को सम्मोहित कर रही है। ऐसे में यात्री बाबा के दर्शनों के साथ इस बर्फीले सौंदर्य का भी भरपूर आनंद ले रहे हैं। यही नहीं, बर्फबारी के बीच प्रशासन की ओर से जुटाई गई व्यवस्थाएं भी यात्रियों को खूब भा रही हैं।

शीतकाल के दौरान केदारपुरी में रिकॉर्ड बर्फबारी हुई है। जिससे धाम में 17 फीट तक बर्फ की चादर बिछ गई थी। नतीजा प्रशासन को पैदल रास्ते, मंदिर परिसर व भवनों के आगे से बर्फ हटाने में ही डेढ़ महीने का वक्त लग गया। इसके अलावा शेष केदारपुरी अब भी बर्फ के आगोश में है। यही वजह है कि इस बार बीते वर्ष की तुलना में शुरुआती दो दिन काफी कम यात्री दर्शनों को पहुंचे। हालांकि, अब धीरे-धीरे यात्रियों की संख्या में इजाफा होने लगा है।

शुरुआती दिनों में हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध न होने के कारण सभी यात्री पैदल रास्ते से ही केदारनाथ पहुंच रहे हैं। इस रास्ते में अभी चार भारी-भरकम हिमखंड खड़े हैं, जिन्हें 20 से 22 फीट काटकर रास्ता तैयार किया गया है। मंदिर परिसर और पैदल रास्ते को छोड़ दें तो बाकी पूरी केदारपुरी में बर्फ के सिवा कुछ नजर नहीं आ रहा। यहां तक कि टेंट भी बर्फ के ऊपर ही लगे हैं। बैंगलुरु (कर्नाटक) से आईं ऊषा रानी कहती हैं वह बर्फ से ढकी केदारपुरी का सौंदर्य निहारकर आल्हादित हैं।

इस अनुपम नजारे को वह कभी नहीं भुला पाएंगी। हैदराबाद (आंध्र प्रदेश) से आए सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी लक्ष्मी कुमार के अनुसार उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि केदारपुरी का ऐसा अद्वितीय रूप देखने को मिलेगा। इस बार भारी बर्फबारी के बाद भी स्थानीय प्रशासन ने जिस तरह धाम में मूलभूत सुविधाएं जुटाई हैं, वह तारीफ के काबिल हैं। यमुनानगर (हरियाणा) से आए एमबीए के छात्र आशु कुमार कहते हैं कि चार हिमखंडों को पार कर केदारनाथ पहुंचना उनके लिए यादगार अनुभव है।

प्रकृति का ऐसा अनूठा रूप उन्होंने आज तक कभी नहीं देखा। मेरठ निवासी शिक्षक कुलदीप वर्मा कहते हैं कि केदारपुरी को यदि स्वर्ग कहा गया जाए तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। बर्फ के बीच यहां उपलब्ध सुविधाएं मन को प्रफुल्लित कर देती हैं।

 

 

 

credit by:jagran

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