आसमान से बरसी मौत! सीरिया में अबतक 700 लोगों की हत्या पांच दिन में 1146 बम गिराए गए |

इस शहर पर पांच दिन में 1146 बम गिराए गए हैं. मरने वालों में 130 बच्चे भी शामिल हैं बेबस औरतें या मासूम बच्चे. उन्हें कोई फिक्र नहीं. क्योंकि सारी लड़ाई कुर्सी की है. ताकत की है. सत्ता की है. ????

इंडिया, कोर न्यूज़ टीम नई Last updated: 03 March 2018 | 17:38:00

आसमान से बरसी मौत! सीरिया में  अबतक 700 लोगों की हत्या  पांच दिन में 1146 बम गिराए गए |

सीरिया से बाहर आई कुछ तस्वीरों ने पूरी दुनिया का हिला कर  रख दिया है.देश की राजधानी दमिश्क के करीब बसी इस जगह को लगातार हो रहे हवाई हमलों ने कंक्रीट के ऐसे ढेर में तब्दील कर दिया है जिसमें शहर ढूंढना असंभव सा नज़र आता है. संभव है, इन्हीं वजहों से घौटा को धरती का नर्क बताया जा रहा है. चार लाख की आबादी वाले एक शहर पर अपनी ही हुकूमत बम पर बम बरसा रही है. 

आसमान से बरसते इन बमों को बरसाने वालों के लिए इस बात के कोई मतलब या मायने नहीं है कि बम किनके सीने पर फट रहे हैं. मरने वाले अपने ही बेगुनाह लोग हैं, बेबस औरतें या मासूम बच्चे. उन्हें कोई फिक्र नहीं. क्योंकि सारी लड़ाई कुर्सी की है. ताकत की है. सत्ता की है. 

इस शहर पर पांच दिन में 1146 बम गिराए गए हैं. मरने वालों में 130 बच्चे भी शामिल हैं. घोउटा शहर मलबे में तब्दील हो चुका है. इसे सीरिय़ा का सबसे नया ज़ख्म कहा जा सकता है. 
मासूम बच्चों को मिली मौत

भला कोई अपने ही शहर के सीने पर बम कैसे बरसा सरता है? जबकि उसे पता है कि बारूद की आंखों पर पट्टी बंधी होती है. वो फटते वक्त ये नहीं देखती कि किसके सीने पर फट रही है. वो फटने वक्त ये नहीं सुनती के धमाकों के शोर में मासूम किलकारिय़ां भी घुट रही हैं. पर क्या करें सत्ता, सियासत और ताकत ने ही जब अपनी आंखें मूंद ऱखी हों तो अंधी बारूद से से शिकवा. सीरिया फिलहाल मौत के इन्हीं अंधे रास्तों पर है.

हर तरफ किलकारियां और चीख पुकार

न जाने कितने मासूम बच्चों की किलकारियां सीरिया से पुकार रही हैं. ये कह रही है कि जिन्हें हमारा मुहाफिज़ होना चाहिए. जिन पर हमारी जिम्मेदारी फर्ज है, वही हमें घेर कर आसमान से मौत बरसा रहे हैं. तख्त की जंग में इंसानी लहू में उनकी कुर्सी के लिए ऑक्सीज़न का काम कर रही है.

घोउटा में जाकर छिपे आतंकी

राजधानी दमिश्क के नज़दीक घोउटा में विद्रोहियों और आतंकी संगठनों ने आम लोगों की बस्ती का रुख किया और उनके बीच जाकर छुप गए. बस फिर क्या था, सीरिया की सत्ता पर काबिज सरकार और उसके दोस्त मुल्क रूस ने मिल कर उन्हीं बस्तियों पर आसमान से बमों की झड़ी लगा दी. विद्रोहियों और आतंकवादियों का पता नहीं पर महज पांच दिन में साढ़े पांच सौ शहरी मारे गए. इनमें करीब 130 मासूम बच्चे भी थे. इन हमले में मारे गए मासूम बच्चों के साथ-साथ महिलाओं की भी बड़ी तादाद है. करीब ढाई हज़ार से ज़्यादा लोग घायल पड़े हैं. मगर वो भी इलाज न मिलने से धीरे धीरे दम तोड़ रहे हैं.

ये बमबारी भी तब हो रही है जबकि संयुक्त राष्ट्र ने 30 दिन के सीज़ फायर यानी युद्ध विराम पर सर्वसम्मति से मंज़ूरी दे रखी है. रूस और सीरियाई राष्ट्रपति असद की सेना के मौजूदा हमले को अब तक का सबसे भीषण हमला माना जा रहा है. अब तक सेना से सीधी-सीधी लड़ाई कर रहे विद्रोही और आईएसआईएस आतंकी अब आम लोगों को अपनी ढाल बना रहे हैं. लिहाज़ा घोउटा को निशाना बनाकर असद सरकार विद्रोहियों और आतंकियों को सरेंडर करने को मजबूर करना चाहती है.

एक हजार से ज्यादा आम लोगों की मौत

पिछले सात साल से गृहयुद्ध की आग में जल रहे सीरिया में घोउटा ही वो शहर है, जो अब विद्रोहियों का आखिरी गढ़ बना हुआ है. लिहाज़ा मुल्क से विद्रोहियों का पूरी तरह से खात्मा करने के लिए असद की सेना ने कोहराम मचा रखा है. इस संघर्ष में पिछले तीन महीनों में करीब 1000 से ज़्यादा आम लोग मारे गए हैं.


घौटा असद के लिए इतना ज़रूरी क्यों


सीरिया की राजधानी दमिश्क से घौटा की दूरी महज़ 10 किलोमीटर है. ऐसे में असद के लिए अपनी सत्ता के ज़ोर की धमक का ऐहसास कराने के लिए इसे अपने कब्ज़े में लेना नाक का सवाल है. 

आपको बता दें कि 104 स्क्वायर किलोमीटर में फैले चार लाख लोगों वाले इस शहर की आबादी में आधी आबादी का हिस्सा सिर्फ बच्चे हैं. इन बच्चों की उम्र 18 साल से कम की है. अभी इस शहर की लड़ाई में काफी खून बहना बाकी है लेकिन दुनिया की एक बहुत बड़ी आबादी इससे बिल्कुल बेख़बर है.    

कुल चार लाख की आबादी वाले इस शहर में इतने बम बरसाए गए हैं कि ज़िंदगी पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है. हर तरफ तबाही, टूटी इमारतें, खंडहर मकान, वीरान बाजार, सुनवृसान सड़कें और जगह-जगह अस्पतालों में मौत से जूझते लोग ही नज़र आ रहे हैं. बीमार लोगों को भी शहर के बाहर जाने पर पाबंदी है.
    


photo credit - facbook 

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